अंधविश्वास से फिर एक महिला की मौत।

 अंधविश्वास ने छीनीं तीन बच्चों के सिर से मां की ममता: सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में महिला ने रास्ते में तोड़ा दम।



रिपोर्ट मदन मोहन नौगढ़ चंदौली 




थाना नौगढ़ अन्तर्गत झुमरिया गांव में : सर्पदंश के बाद समय पर इलाज मिलने के बजाय अंधविश्वास के फेर में उलझने से एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। खाना बनाने के लिए घर में से लकड़ी लेने गई 35 वर्षीया गीता कुमारी को विषैले सांप ने काट लिया। अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन उन्हें झाड़-फूंक कराने ले जाने लगे, जिससे सही समय पर इलाज न मिलने के कारण महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मृतका अपने पीछे तीन मासूम बच्चों—21 वर्षीय अजय, 14 वर्षीय बेटी और 11 वर्षीय छोटे बेटे को बिलखता छोड़ गई हैं।

जानकारी के अनुसार, झुमरिया गांव निवासी 'कल्लू' की पत्नी गीता कुमारी (35) घर में खाना बनाने के लिए घर में रखीलकड़ियां लेने गई थीं। लकड़ियों के ढेर में छिपे एक अत्यधिक विषैले सांप ने उनके बाएं हाथ की तर्जनी उंगली में काट लिया। सांप के काटते ही महिला ने शोर मचाया, जिस पर आसपास के लोग और परिजन एकत्र हो गए। और झाड़ फूंक कराने लगे झाड फूंक के दौरान मौत हो गई 

यदि अस्पताल जाने में देरी नहीं होती तो शायद जान बच सकती थी

 लेकिन अज्ञानता और अंधविश्वास के चलते परिजन व ग्रामीण उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय ओझा-सोखा के पास झाड़-फूंक कराने के लिए ले जाने लगे। झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बीतता गया और जहर पूरे शरीर में फैल गया। रास्ते में ही गीता कुमारी की सांसें थम गईं।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। थाना नौगढ़ की पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी हाउस (शवगृह) भेज दिया।

बिलखते बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

मां के अचानक चले जाने से तीनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़ा बेटा अजय अपनी मां को खोने के गम में बदहवास है, वहीं 14 साल की बेटी निशा और 11 साल का मासूम बेटा गणेश।अब भी इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी।

 अपील: सर्पदंश (सांप के काटने) की स्थिति में झाड़-फूंक या देसी टोटकों में बिल्कुल समय न गंवाएं। मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी या बड़े अस्पताल ले जाएं, जहां एंटी-वेनम (Anti-Venom) के जरिए जान बचाई जा सकती है।

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